अफगानिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- डूरंड लाइन सिर्फ काल्पनिक रेखा:कहा- पूरा पश्तून इलाका हमारा; अफगान लोग चाहेंगे तब ये मामला उठाया जाएगा

 

अफगानिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- डूरंड लाइन सिर्फ काल्पनिक रेखा: कहा- पूरा पश्तून इलाका हमारा; अफगान लोग चाहेंगे तब ये मामला उठाया जाएगा


तालिबान (Taliban), अफगानिस्तान में एक देवबंदी इस्लामी कट्टरपंथी जिहादी राजनीतिक आंदोलन है . ये स्वयं को अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात के नाम से भी संदर्भित करता है. संयुक्त राज्य अमेरिका के आक्रमण के बाद, इसने 1996-2001 तक देश के लगभग तीन-चौथाई हिस्से पर शासन किया.


अफगानिस्तान में तालिबान की जीत से खुश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट फैज हमीद का जश्न कुछ ही दिनों में गायब होता दिख रहा है। दरअसल, तालिबान ने 130 साल पुरानी पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर डूरंड लाइन की वैधता पर सवाल उठा दिए हैं।


अफगानिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- डूरंड लाइन सिर्फ काल्पनिक रेखा:कहा- पूरा पश्तून इलाका हमारा; अफगान लोग चाहेंगे तब ये मामला उठाया जाएग
एक घंटा पहले

कहा- पूरा पश्तून इलाका हमारा; अफगान लोग चाहेंगे तब ये मामला उठाया जाएगा|




अफगानिस्तान में तालिबान की जीत से खुश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट फैज हमीद का जश्न कुछ ही दिनों में गायब होता दिख रहा है। दरअसल, तालिबान ने 130 साल पुरानी पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर डूरंड लाइन की वैधता पर सवाल उठा दिए हैं।


अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री और तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मौलवी याकूब मुजाहिद ने कहा है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच का बॉर्डर सिर्फ ‘काल्पनिक रेखा’ है।




पाकिस्तान सुरक्षा और तस्करी रोकने का हवाला देते हुए 2,640 किमी लंबी डूरंड लाइन पर तारबंदी कर रहा है। जिसे लेकर अफगानिस्तान नाराज है।
अफगानिस्तानी विशेषज्ञ अली आदिल का कहना है कि डूरंड लाइन ‘औपनिवेशिक रूप से थोपी’ हुई है। जो पश्तून जनजातियों के पैतृक घरों को दो देशों में बांट देती है। आदिल कहते हैं कि ब्रिटिश अधिकारियों और रहमान के बीच समझौते की 100 साल की समय सीमा थी, जो 1993 में समाप्त हो गई थी। सुरक्षा और तस्करी का बहाना करके पाकिस्तान डूरंड लाइन को वैश्विक स्तर पर स्थायी सीमा की मान्यता दिलाना चाहता है।




पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार इलियास खान कहते हैं कि तालिबान को गंभीरता से लेना चाहिए। साफ है कि तालिबान के डूरंड लाइन मुद्दे पर पीछे हटने की संभावना नहीं है। मोहम्मद गनी और हामिद करजई सरकार ने भले ही संयम दिखाया हो, लेकिन, तालिबान का डिप्लोमेसी में कोई यकीन नहीं है। पहले यूएसएसआर और फिर अमेरिका जैसी महाशक्तियों को हराने के बाद दंभ में चूर तालिबान ताकत के इस्तेमाल से हिचकिचाएगा नहीं।





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