आधुनिक दासता

 आधुनिक दुनिया में क्यों बढ़ रही गुलामी, उत्तर कोरिया में सबसे ज्यादा, भारत भी अछूता नहीं



वैश्विक दासता सूचकांक 2023 के अनुसार, अनुमानित 50 मिलियन लोग वर्ष 2021 में किसी भी दिन आधुनिक गुलामी/दासता के शिकार थे। वर्ष 2016 के बाद इस संख्या में 10 मिलियन लोगों की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि विश्व में प्रत्येक 160 में से एक व्यक्ति आधुनिक दासता का शिकार हैं 

ये माना जाता था कि दुनिया जैसे जैसे विकास की ओर बढ़ेगी और तकनीक उसे आधुनिक बनाएगी, वैसे वैसे मनुष्यों की स्थिति बेहतर होगी लेकिन आंकड़ें कहते हैं कि आधुनिक दुनिया में गुलामी के हालात बढ़ रहे हैं और गुलामों जैसे काम करने के भी. उसमें दुनिया का हर देश शामिल है. बस यूरोपीय देशों में हालात बेहतर है












राइट्स ग्रुप वाक फ्री फाउंडेशन ने मई के आखिरी हफ्ते में 160 देशों की ग्लोबल स्लेवरी लिस्ट जारी की. इसमें इस संगठन ने इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन (आईएलओ) , वाक फ्री और इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों की मदद ली. ये इंडैक्स हमारी उस दुनिया की स्याह तस्वीर दिखाता है कि हमारी तरक्की मनुष्यों को बेहतर जिंदगी देने की बजाए गुलाम बना रहा है.

रिपोर्ट कहती है कि जी20 देशों ने अपनी व्यापार गतिविधियों और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के जरिए इस संकट को बढाया है. अगर इस रिपोर्ट के आंकड़ों को मानें तो लगता है कि असमानता की खाई गहरी हो रही है.

कैसे बढ़ रही है आधुनिक दासता


यह आर्थिक विकास को भी बाधित करती है, असमानता को बनाए रखती है. भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है. ये संघर्ष, आतंकवाद एवं संगठित अपराध को भी बढ़ावा देकर वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिये खतरा पैदा करती है.अगर पिछले पांच साल में आधुनिक दासता की बढ़ती संख्या पर गौर करें तो ये संख्या काफी ज्यादा बढ़ी है. कहा जा सकता है फिलहाल दुनिया में हर 160 में एक व्यक्ति आधुनिक दासता का शिकार है.


सबसे ज्यादा खराब हालत उत्तर कोरिया की
सबसे ज्यादा ये स्थिति उत्तर कोरिया (104.6), इरिट्रिया (93) तथा मौरतानिया (79) में खराब है, जहां आधुनिक दासता काफी ज्यादा है और सरकार की ओर से भी इस पर रजामंदी लगती है. सबसे कम प्रचलन वाले देशों में यूरोपीय देश हैं. उसके अलावा न्यूजीलैंड भी, जहां मज़बूत शासन और नीतियां इस तरह के हालात को कम करते हैं. आधुनिक दासता में एशिया और प्रशांत के लोगों की संख्या सबसे अधिक है (29.3 मिलियन).



भारत में 1000 में 8 लोग दासता के घेरे में
भारत में इसकी दर 1000 में 08 लोगों की है. जिन देशों में हालत खऱाब है, उसमें तमाम वजहें तो हैं लेकिन मुख्य राजनीतिक अस्थिरता, असमानता, बुनियादी ज़रूरतों की कमी, आपराधिक न्याय तंत्र, आंतरिक संघर्ष और विस्थापन जैसे कारण हैं, जो लोगों को आधुनिक गुलाम बना रहे हैं.


वैश्विक दासता सूचकांक 2023 की प्रमुख उपलब्धियाँ: 

  • प्रमुख बिंदु:  
  • वैश्विक दासता सूचकांक 2023 के अनुसार, अनुमानित 50 मिलियन लोग वर्ष 2021 में किसी भी दिन आधुनिक गुलामी/दासता के शिकार थे। वर्ष 2016 के बाद इस संख्या में 10 मिलियन लोगों की वृद्धि हुई है।
  • इसका मतलब है कि विश्व में प्रत्येक 160 में से एक व्यक्ति आधुनिक दासता का शिकार है।
  • यह प्रति 1,000 लोगों पर आधुनिक दासता के अनुमानित प्रसार के आधार पर 160 देशों की रैंकिंग करता है।
  • अधिकतम प्रसार वाले देश उत्तर कोरिया (104.6), इरिट्रिया (93) तथा मॉरिटानिया (79) हैं जहाँ आधुनिक दासता व्यापक और प्राय: राज्य प्रायोजित है।
  • सबसे कम प्रचलन वाले देश आइसलैंड (0.6), आयरलैंड (0.8) तथा न्यूज़ीलैंड (0.9) हैं जहाँ मज़बूत शासन और आधुनिक दासता के लिये प्रभावी प्रतिक्रियाएँ स्पष्ट हैं।
  • आधुनिक दासता में एशिया और प्रशांत के लोगों की संख्या सबसे अधिक है (29.3 मिलियन)
  • भारत में 8 की व्यापकता है। (प्रति हज़ार लोगों पर आधुनिक दासता में रहने वाली जनसंख्या का अनुमानित अनुपात)।




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