मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव

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 Madhya Pradesh Election 2023: कर्नाटक फतह के बाद अब मिशन एमपी के लिए भोपाल में डेरा डालेंगे सुनील, भोपाल में तैयार हुआ वार रूम

पांच बार से हार रही 66 सीटों पर कांग्रेस ने उतारे ऑब्जर्वर, चोपड़ा को भोपाल का जिम्मा


प्रदेश में विधानसभा चुनाव में फतह के लिए कांग्रेस इस बार विधानसभा की 230 में से 1-1 सीट पर फोकस कर रही है। कांग्रेस की चुनावी तैयारियों में राष्ट्रीय स्तर से नेताओं की मप्र में एंट्री हो गई है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल के बीच हुई चर्चा के बाद दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड से मप्र आए चारों ऑब्जर्वर को एआईसीसी की सहमति से लगातार पांच बार से हार रही सीटों की जिम्मेदारी दी है।

Madhya Pradesh Assembly Election 2023: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को अब केवल 6 महीने रह गए हैं. प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल बीजेपी और कांग्रेस चुनावी वार रूम के सेटअप के साथ स्ट्रेटेजिक एक्सपर्ट की सेवाएं लेने लगे हैं.  कांग्रेस ने अपने पुराने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का उत्तराधिकरी खोज लिया है, जिसने कर्नाटक में उसे बम्पर जीत दिला दी है.


चुनावों में कांग्रेस की रणनीति के नए शिल्पकार सुनील कानुगोलू (Sunil Kanugolu) का जादू कर्नाटक चुनाव में जमकर चला है.  कर्नाटक में कांग्रेस को बम्पर जीत दिलाने के बाद अब बारी मध्य प्रदेश की है. वो मध्य प्रदेश में कमलनाथ (Kamal Nath) और दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) के साथ मुख्य रणनीतिकार की भूमिका में नजर आएंगे. कांग्रेस सांसद नकुलनाथ (Nakul Nath) के भोपाल (Bhopal) स्थित बंगले को सुनील कानुगोलू का वार रूम बनाया गया है.

खासतौर पर दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुभाष चोपड़ा को भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है। वे गोविंदपुरा, बैरसिया, हुजूर और नरेला, भोजपुर, बुदनी,आष्टा, सीहोर, होशंगाबाद, सोहागपुर, पिपरिया, सिलवानी, शमशाबाद और कुरवाई सीटों का फीडबैक लेकर प्रारंभिक तौर पर स्थानीय नेताओं और पीसीसी से चर्चा के बाद इन सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी रिपोर्ट देंगे। महाकौशल और विंध्य की जिम्मेदारी उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे प्रदीप टम्टा को सौंपी गई है।


ग्वालियर-चंबल की जिम्मेदारी कुलदीप राठौर को


ग्वालियर-चंबल अंचल की सीटों में गुना, शिवपुरी समेत अन्य सीटें जिन पर कांग्रेस लगातार तीन से पांच चुनावों में हार रही है। इन सीटों की जिम्मेदारी कुलदीप राठौर को दी गई है। गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष रहे अर्जुन मोरवड़िया को मालवा और निमाड़ की हार वाली सीटें दी गई हैं। इन सीटों में सारंगपुर, सुसनेर, शुजालपुर, देवास, खातेगांव, बागली, खंडवा, पंधाना, बुरहानपुर, धार, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, रतलाम सिटी, मल्हारगढ़, नीमच और जाबद सीटों की जिम्मेदारी दी गई है। इन 66 सीटों में से 40 सीटों पर पिछले तीन महीनों में पीसीसी चीफ कमलनाथ पहुंच चुके हैं और जिला पदाधिकारियों, मंडलम और सेक्टर प्रभारियों की बैठक ले चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ग्राउंड जीरो पर इन सीटों पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।


राहुल, प्रियंका और खड़गे के कार्यक्रमों की रूपरेखा हो रही तैयार


इधर, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी 12 जून को जबलपुर से रोड शो और आमसभा संबोधित कर विधानसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत करने जा रही है। इसके बाद कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आमसभाओं को लेकर पीसीसी, एआईसीसी से समन्वय कर कार्यक्रम तैयार कर रही है। इस बारे में अभी प्रारंभिक औपचारिक चर्चा ही हुई है। राहुल गांधी और खड़गे के प्रदेश में जुलाई, अगस्त के बाद आगे चुनाव तक के प्रोग्राम तैयार होंगे।



कमलनाथ 6 जून को जाएंगे पिपल्यामंडी


कमलनाथ 6 जून को मंदसौर गोलीकांड की बरसी पर जिसमें सात साल पहले आंदोलनकारी किसानों की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस दौरान कांग्रेस ने पिपल्यामंडी में किसानों की आमसभा का आयोजन किया है, इस सभा में कमलनाथ पहुंच रहे हैं।


कर्नाटक में हिट रहा कैंपेन

कभी पीएम मोदी और बीजेपी के चुनावी रणनीतिकार रहे सुनील कानुगोलू को मार्च 2023 में कर्नाटक और तेलंगाना के साथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. सुनील राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के भी मुख्य सूत्रधार थे.कर्नाटक में कांग्रेस के लिए सुनील का 40 % PayCM कैंपेन जमकर हिट रहा है, जिसने बीजेपी को सत्ता से बाहर करने प्रमुख भूमिका निभाई. वह अपने वन लाइनर कैंपेन के कारण राजनीतिक दलों में खूब चर्चा में रहते हैं.




मध्य प्रदेश के लोगों के लिए सुनील

कानुगोलू का नाम बेहद चौंकाने वाला हो सकता है. लेकिन देश के राजनीतिक गलियारों में व्यापक जाना पहचाना नाम बन चुके हैं. राजनीतिक चर्चा से पहले उनके बैकग्राउंड को जान लेते हैं. कन्नड़ पिता और तेलुगु मां की संतान कानुगोलू ने जिंदगी का लंबा हिस्सा तमिलनाडु में बिताया है. उनकी अधिकांश पढ़ाई चेन्नई में हुई है. उन्होंने अंडरग्रेजुएट के तौर पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. साल 2009 में अमेरिका से भारत लौटने के पहले सुनील ने फाइनेंस में एमएस और एमबीए की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल की थी. इसके बाद से सुनील पॉलिटिकल या इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर कई राजनीतिक दलों के लिए काम कर चुके हैं.




सुनील 2014 में आईपैक के साथ जुड़े थे

कांग्रेस ने कर्नाटक और तेलंगाना के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सुनील कानुगोलु को इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट बनाया था. कर्नाटक फतह करके सुनील ने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है. अब सुनील के जिम्मे ग्राउंड रियलिटी के आधार पर मध्य प्रदेश में इलेक्शन कैंपेन तैयार करना है. बताया जाता है कि सुनील साल 2014 में प्रशांत किशोर की कंपनी आईपैक के साथ जुड़े थे. बाद में प्रशांत किशोर ने पीएम मोदी का साथ छोड़ दिया, लेकिन सुनील और उनकी टीम बीजेपी के साथ रही. 



साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सुनील ने इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर मुख्य भूमिका निभाई. उन्होंने बीजेपी को शानदार जीत दिलाकर योगी आदित्यनाथ के लिए सीएम की कुर्सी का रास्ता साफ किया. बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ द्रमुक के लिए 2019 लोकसभा चुनाव व अन्नाद्रमुक के लिए तमिलनाडु का 2021 विधानसभा चुनाव में सुनील मुख्य रणनीतिकार रह चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद पार्टी की साख को मजबूत बनाकर बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय सुनील को दिया गया था. सुनील अपना काम कर्नाटक चुनाव में खत्म कर चुके हैं. अब वो बाकी राज्यों में भी कांग्रेस के लिए वार रूम सेटअप तैयार करेंगे.



भारत जोड़ो यात्रा की रणनीति भी की थी तय

कर्नाटक में बीजेपी घेरने के लिए सुनील ने एक यूनिक आईटी प्रोग्राम तैयार किया.यहां 40% PayCM कैंपेन के माध्यम से उन्होंने बीजेपी सरकार के भ्रष्टाचार पर चोट की. उन्होंने एक QR कोड के बीच कर्नाटक के सीएम की फोटो लगाकर उन्हें 40% कमीशन लेने वाला भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताया. यह व्यंग्यात्मक कैंपेन कर्नाटक के साथ पूरे देश में चर्चा का विषय बना. कहा जाता है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की रणनीति भी उन्होंने ही तय की थी. यात्रा के समापन पर कश्मीर में तिरंगा झंडा फहराने का आइडिया भी उन्हीं का था. सुनील फिलहाल कर्नाटक और तेलंगाना में भी वे कांग्रेस का चुनाव मैनेजमेंट संभाल रहे हैं. मध्य प्रदेश में सुनील के सामने कांग्रेस पार्टी को 2023 के विधानसभा चुनाव में विजय दिलाने के लिए तमाम चुनौतियां हैं.

सुनील के सामने दस चुनौतियां

1. मध्यप्रदेश में ठंडे पड़े पार्टी के संगठन में जान फूंकना



2. किसान कर्ज माफी योजना की विसंगतियों को दूर करना



3. बीजेपी के 18 साल के शासन के खिलाफ एन्टी इनकंबेंसी स्थापित करना



4. कर्नाटक जैसा सरकार के भ्रष्टाचार सहित अन्य मुद्दों पर आक्रामक इलेक्शन कैम्पेन तैयार करना.



5. बीजेपी की लाडली बहना जैसी गेम चेंजर योजनाओं का नारी सम्मान योजना के माध्यम से काउंटर करना.



6. प्रत्याशी चयन में जातीय और क्षेत्रीय भावनाओं का ध्यान रखना तथा स्थानीय मुद्दों की पहचान कर सरकार के खिलाफ नैरेटिव सेट करना.




7. पार्टी के अंदर भितरघात को रोकना और टिकिट न मिलने से असंतुष्ट नेताओं का पलायन रोकना.

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